Unicode और Kruti Dev में अंतर
दोनों में बुनियादी फ़र्क़
यूनिकोड (Unicode) एक अंतरराष्ट्रीय मानक है जिसमें दुनिया की लगभग हर भाषा के हर अक्षर को अपना एक निश्चित कोड मिला है। देवनागरी का "क" हर कंप्यूटर, मोबाइल और वेबसाइट पर वही "क" माना जाता है। इसलिए यूनिकोड टेक्स्ट किसी भी फ़ॉन्ट में खुल सकता है, जैसे Mangal, Noto Sans Devanagari या Nirmala UI।
कृतिदेव (Kruti Dev) में ऐसा नहीं है। वहाँ हिंदी का अक्षर असल में अंग्रेज़ी वर्ण के कोड पर बैठा होता है और फ़ॉन्ट उसे हिंदी शक्ल देता है। फ़ॉन्ट बदलते ही पाठ बिगड़ जाता है।
सीधी तुलना
नीचे दोनों की मुख्य बातें साथ-साथ दी गई हैं:
- पढ़ने की सुविधा: यूनिकोड हर डिवाइस पर पढ़ा जाता है। कृतिदेव तभी पढ़ा जाता है जब फ़ॉन्ट लगा हो।
- वेब और मोबाइल: यूनिकोड वेबसाइट, WhatsApp, ईमेल और सोशल मीडिया पर सही चलता है। कृतिदेव वहाँ गड़बड़ हो जाता है।
- सर्च और कॉपी: यूनिकोड में सर्च, कॉपी-पेस्ट और Google अनुवाद सही चलते हैं। कृतिदेव में नहीं।
- टाइपिंग की आदत: कृतिदेव में रेमिंगटन लेआउट वाले टाइपिस्ट तेज़ टाइप करते हैं। यूनिकोड के लिए इनस्क्रिप्ट या फ़ोनेटिक कीबोर्ड इस्तेमाल होता है।
- पुरानी फ़ाइलें: पुराने दफ़्तरी टेम्पलेट और छपाई की फ़ाइलें अक्सर कृतिदेव में होती हैं।
एक ही शब्द के दोनों रूप
उदाहरण के लिए "कार्य" शब्द यूनिकोड में सीधे क, ा, र, ्, य अक्षरों से बनता है। वही शब्द कृतिदेव में "dk;Z" के रूप में लिखा जाता है, जो Kruti Dev फ़ॉन्ट में "कार्य" दिखता है। अगर आप "dk;Z" को Mangal फ़ॉन्ट में बदल दें तो यह अंग्रेज़ी अक्षर ही दिखेंगे।
यही कारण है कि कृतिदेव का पाठ गलती से किसी ऐसे सिस्टम में खुल जाए जिसमें वह फ़ॉन्ट न हो, तो लोग "अजीब अक्षर आ रहे हैं" की शिकायत करते हैं।
कब कौन-सा चुनें?
अगर आपका काम वेबसाइट, सोशल मीडिया, ईमेल, ऐप या सर्च से जुड़ा है, तो यूनिकोड ही सही है। भविष्य की फ़ाइलों के लिए भी यूनिकोड ज़्यादा सुरक्षित है, क्योंकि फ़ॉन्ट बदलने पर भी पाठ नहीं बिगड़ता।
अगर आपके दफ़्तर के टेम्पलेट, प्रिंटर या पुराने रिकॉर्ड कृतिदेव में चलते हैं, तो वहाँ कृतिदेव ही रखना पड़ेगा। ऐसे में सबसे अच्छा रास्ता यह है कि मसौदा यूनिकोड में लिखें और अंतिम दस्तावेज़ के लिए कन्वर्टर से कृतिदेव बना लें।
कन्वर्टर की भूमिका
यूनिकोड से कृतिदेव कन्वर्टर इन दोनों दुनियाओं के बीच पुल है। इसमें सबसे ज़रूरी बात यह है कि छोटी इ की मात्रा, रेफ़, आधे अक्षर और जोड़ाक्षर सही जगह पर बैठें। ScanHindi का कन्वर्टर इन्हीं नियमों को ध्यान में रखकर बनाया गया है और असली दफ़्तरी पत्रों से मिलाकर जाँचा गया है।
दफ़्तर के काम में व्यावहारिक सलाह
बहुत से दफ़्तरों में एक ही फ़ाइल कई लोगों के बीच घूमती है। अगर सब के कंप्यूटर में एक जैसा फ़ॉन्ट नहीं है, तो कृतिदेव की फ़ाइल कहीं-कहीं बिगड़ी दिख सकती है। ऐसी जगह फ़ाइल भेजने से पहले PDF बना लेना अच्छा रहता है, ताकि पाठ वैसा ही दिखे जैसा आपने लिखा।
दूसरी ओर, अगर आप किसी वेबसाइट या ऐप के लिए सामग्री तैयार कर रहे हैं तो कृतिदेव कभी न डालें। उसे सर्च इंजन नहीं पढ़ पाएगा और पाठकों को केवल अंग्रेज़ी जैसे अक्षर दिखेंगे। इसलिए हमेशा देखें कि पाठ कहाँ जाने वाला है, फिर उसी हिसाब से यूनिकोड या कृतिदेव चुनें।
एक और बात यह कि यूनिकोड में लिखा पाठ भविष्य में भी सुरक्षित रहता है। आज का कोई भी नया सॉफ़्टवेयर, जैसे नए Word संस्करण, मोबाइल ऐप और ब्राउज़र, यूनिकोड को ही सबसे पहले सहारा देते हैं। इसलिए अपनी पुरानी महत्वपूर्ण फ़ाइलों की एक यूनिकोड प्रति भी बचाकर रखना समझदारी है।
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