कृतिदेव (Kruti Dev 010) फ़ॉन्ट क्या है?
कृतिदेव फ़ॉन्ट का परिचय
कृतिदेव (Kruti Dev) हिंदी टाइपिंग का एक बहुत पुराना और लोकप्रिय फ़ॉन्ट है। इसका सबसे ज़्यादा चलने वाला रूप "Kruti Dev 010" है। कंप्यूटर पर हिंदी टाइप करने वाले कई लोग इसी फ़ॉन्ट से सीखते आए हैं। सरकारी दफ़्तरों, कचहरी, तहसील, स्कूल-कॉलेज, टाइपिंग सेंटर और प्रिंटिंग प्रेस में आज भी इसका काफ़ी इस्तेमाल दिखता है।
यह फ़ॉन्ट देखने में हिंदी जैसा लगता है, पर असल में यह अंग्रेज़ी वर्णों (A, B, c, d जैसे ASCII कोड) पर चलता है। यानी कंप्यूटर के लिए आपका लिखा "dk;Z" है, जिसे Kruti Dev फ़ॉन्ट स्क्रीन पर "कार्य" बनाकर दिखाता है। फ़ॉन्ट बदलते ही वही अक्षर अंग्रेज़ी जैसे दिखने लगते हैं।
यह इतना लोकप्रिय क्यों हुआ?
जब कंप्यूटर में यूनिकोड हिंदी का चलन नहीं था, तब हिंदी लिखने का यही आसान तरीक़ा था। टाइपिस्ट रेमिंगटन टाइपराइटर वाले कीबोर्ड लेआउट के आदी थे। कृतिदेव ने उसी लेआउट को कंप्यूटर पर चलाना आसान कर दिया, इसलिए टाइपिस्टों को नया कीबोर्ड सीखना नहीं पड़ा।
कई दफ़्तरों में सालों की फ़ाइलें, नोटिस, आदेश और टेम्पलेट इसी फ़ॉन्ट में बने हैं। इसलिए नया सिस्टम आने के बाद भी लोग उसी फ़ॉन्ट में काम करते रहते हैं।
कृतिदेव में टेक्स्ट कैसे बनता है?
कृतिदेव में एक अक्षर कई कोड से मिलकर बनता है। कुछ बातें जो इसे यूनिकोड से अलग बनाती हैं:
- "ि" की छोटी इ की मात्रा अक्षर से पहले टाइप होती है। जैसे "स्थिति" का कोड "fLFkfr" है, जिसमें "f" शुरू में आता है।
- रेफ़ (र्) अक्षर के बाद आता है और उसे "Z" से लिखा जाता है। जैसे "कार्य" का कोड "dk;Z" है।
- आधे अक्षर और जोड़ाक्षरों के अपने अलग कोड होते हैं, जैसे क्ष, त्र, ज्ञ, श्र।
- अंग्रेज़ी अक्षर और विराम-चिह्न भी हिंदी के कोड में इस्तेमाल हो जाते हैं, इसलिए कोई अंग्रेज़ी शब्द उसी फ़ॉन्ट में आए तो बिगड़ा हुआ दिखता है।
कृतिदेव की सीमाएँ
कृतिदेव का टेक्स्ट सिर्फ़ तभी सही दिखता है जब सामने वाले के कंप्यूटर में भी वही फ़ॉन्ट लगा हो। फ़ॉन्ट न होने पर पूरा पाठ बेतुके अंग्रेज़ी अक्षरों में दिखता है। यही कारण है कि इस टेक्स्ट को सीधे वेबसाइट, WhatsApp या सर्च इंजन में डालना ठीक नहीं रहता। सर्च भी नहीं हो पाती और मोबाइल पर पढ़ना भी कठिन होता है।
इन्हीं कारणों से आजकल वेब, मोबाइल और ईमेल के लिए यूनिकोड ज़्यादा सही माना जाता है। पर दफ़्तर के कामकाज में, जहाँ पहले से कृतिदेव में फ़ाइलें बनी हैं, लोगों को दोनों के बीच बदलने की ज़रूरत पड़ती है।
ऑनलाइन कन्वर्टर कब काम आता है?
मान लीजिए आपने मोबाइल या Google Docs में यूनिकोड हिंदी में कोई पत्र लिखा है और उसे दफ़्तर के Word टेम्पलेट में कृतिदेव में चाहिए। दोबारा पूरा टाइप करने के बजाय आप उसे ScanHindi के कन्वर्टर में पेस्ट कर सकते हैं। "Convert to Krutidev" दबाते ही कृतिदेव टेक्स्ट बन जाता है, जिसे "Word में कॉपी करें" से सीधे Word में चिपका सकते हैं।
यह बदलाव आपके ब्राउज़र में ही होता है, आपका टेक्स्ट हमारे सर्वर पर नहीं जाता। फिर भी ज़रूरी सरकारी दस्तावेज़ छापने या जमा करने से पहले एक बार आउटपुट पढ़ लेना हमेशा अच्छा रहता है।
निष्कर्ष
कृतिदेव एक पुराना पर आज भी काम आने वाला फ़ॉन्ट है। इसकी ताक़त इसकी जानी-पहचानी टाइपिंग-पद्धति और दफ़्तरों में मौजूद पुराने टेम्पलेट हैं। कमज़ोरी यह है कि यह फ़ॉन्ट के बिना सही नहीं दिखता। इसलिए सबसे व्यावहारिक तरीक़ा यह है कि नया पाठ यूनिकोड में लिखें और ज़रूरत पड़ने पर ही कृतिदेव में बदलें।
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